अमेरिका के मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी के दौरान एक उम्मीदवार के समर्थन में सोशल मीडिया पर प्रचार सामग्री फैलाने के लिए भारत स्थित कई अकाउंट्स को पैसे दिए जाने का मामला सामने आया है।
अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक नेटवर्क ने डेमोक्रेटिक सांसद हेली स्टीवंस के समर्थन में दर्जनों वीडियो प्रसारित किए। इन वीडियो को सामान्य मतदाताओं के स्वतः दिए गए साक्षात्कारों की तरह प्रस्तुत किया गया था।
सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 36 वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा किए गए। इनमें कथित मतदाता महंगाई और जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दों पर बातचीत करते दिखाई दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो साझा करने वाले अकाउंट्स को प्रति एक हजार व्यूज पर एक से पांच डॉलर तक का भुगतान किया जा रहा था।
हालांकि, वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया था मानो वे सामान्य मतदाताओं द्वारा स्वाभाविक रूप से साझा की गई सामग्री हों।
इस प्रचार अभियान की पहचान दुष्प्रचार का अध्ययन करने वाले दो शोध समूहों, एंटीबॉट4नवलनी और क्लेम्सन यूनिवर्सिटी के मीडिया फॉरेंसिक्स हब ने की।
एंटीबॉट4नवलनी ने एक्स पर 28 अकाउंट्स की पहचान की, जिनके जरिए साझा किए गए वीडियो को कुल 70 लाख से अधिक बार देखा गया।
वहीं क्लेम्सन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ अकाउंट्स पहले चीन से जुड़े कथित बॉट नेटवर्क से भी संबंधित पाए गए थे।
रिपोर्ट में मुंबई स्थित आयुष जैन नामक एक व्यक्ति का भी उल्लेख किया गया है, जिसने अखबार को बताया कि उसे सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने के बदले पैसे मिले थे।
जैन के अनुसार, उसने लगभग 40 पोस्ट साझा किए और प्रत्येक पोस्ट के लिए करीब 15 डॉलर कमाए।
उसने बताया कि यह काम उसे लुमिना क्लिपर्स नामक कंपनी से मिला था।
लुमिना क्लिपर्स अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य में पंजीकृत कंपनी है, जिसका संचालन आयरिश नागरिक रीस मैके करते हैं।
मैके ने कंपनी की इस प्रचार गतिविधि में भूमिका स्वीकार की, लेकिन गोपनीयता का हवाला देते हुए यह बताने से इनकार कर दिया कि अभियान के लिए किसने भुगतान किया था।




















