प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान न किया जाना वैश्विक एकजुटता के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है और इस समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।
फ्रांस के एवियन में G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘नई साझेदारियां गढ़ना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण’ विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को दाता और प्राप्तकर्ता के पुराने ढांचे से आगे बढ़कर एकजुटता तथा समान स्वामित्व पर आधारित होना चाहिए।
मोदी ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान की कमी वैश्विक एकजुटता के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि विश्व में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में संवाद तथा कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि अनिश्चितता से भरी दुनिया में व्यापार और प्रौद्योगिकी का संकीर्ण हितों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास की कमी पैदा हो रही है।
मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा ‘‘मानवता प्रथम’’ के सिद्धांत का पालन किया है और यह विचार आज भी नई दिल्ली के प्रयासों के केंद्र में बना हुआ है।
G-7 सम्मेलन से इतर मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ भी बैठक की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खेल समेत कई क्षेत्रों में मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की।
मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए निवेश संबंधों को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

















