सिख नेता इमान सिंह ने “वंदे मातरम” को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा है कि सिख समुदाय इसे किसी भी तरह के राष्ट्रीय गीत या अनिवार्य नारे के रूप में स्वीकार नहीं करेगा। सिख नेता ने कहा कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा साबित करने के लिए किसी विशेष धार्मिक प्रतीक या नारे को स्वीकार करना जरूरी नहीं है।
वंदे मातरम (जिसका अर्थ है 'माँ, मैं तुम्हें नमन करता हूँ') की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत-मिश्रित बंगाली भाषा में की थी। अक्टूबर 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमिटी के एक प्रस्ताव में यह सुझाव दिया गया था कि जब भी राष्ट्रीय सभाओं में 'वंदे मातरम' गाया जाए, तो केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाने चाहिए।
