इस्लाम अपनाने वाले 31 वर्षीय युवक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज़ाद किया
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इस्लाम अपनाने वाले 31 वर्षीय युवक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज़ाद किया
इसमें आरोप लगाया गया था कि मलिक को उनके पिता देवराज सिंह मलिक ने राज्य अधिकारियों की मदद से अवैध रूप से हिरासत में रखा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 वर्षीय आयुष मलिक को स्वतंत्र कर दिया है। मलिक ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया था और इसके बाद उनके पिता ने उन्हें धमकाया तथा अवैध रूप से घर में रोके रखा। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक वयस्क व्यक्ति को सामान्य रूप से अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपना धर्म चुनने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि ऐसा चुनाव सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि वह परिवार के सदस्यों को स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी वयस्क का जीवनसाथी चुनना व्यक्तिगत स्वायत्तता का मामला है और परिवार की असहमति अपने आप इस अधिकार को सीमित करने का वैध आधार नहीं बन सकती। यह याचिका आयुष मलिक के एक मित्र ने दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि मलिक को उनके पिता देवराज सिंह मलिक ने राज्य अधिकारियों की मदद से अवैध रूप से हिरासत में रखा है।


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