काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद की दीवार पर 12 जून को एक नोटिस में मस्जिद को कथित रूप से रेलवे की जमीन पर बना ‘‘अवैध निर्माण’’ बताया गया और मस्जिद कमेटी से 20 जून तक इसे हटाने को कहा गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय तारीख तक मस्जिद नहीं हटाई गई, तो रेलवे प्रशासन स्वयं ढांचे को हटाने और ध्वस्त करने की कार्रवाई कर सकता है।
गंज शहीदा मस्जिद की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद, वाराणसी ने 13 जून को जवाबी बयान जारी किया। कमेटी ने रेलवे प्रशासन के दावों को ‘‘भ्रामक’’ बताया और कहा कि वे कानूनी कार्यवाही की गलत व्याख्या पर आधारित हैं।
कमेटी ने यह भी कहा कि जिस मुकदमे का हवाला दिया गया है, वह मस्जिद की मिल्कियत या उसके अस्तित्व से संबंधित नहीं था। उसके अनुसार, मामला मस्जिद के पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और उसका मस्जिद की इमारत से कोई संबंध नहीं था। अंजुमन इंतजामिया ने कहा कि मस्जिद का इतिहास हिजरी वर्ष 1034, यानी लगभग 1624-25 ईस्वी तक जाता है। कमेटी के अनुसार, मस्जिद 1883-84 के सेटलमेंट नक्शों और पुराने राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज है।























