रिलायंस इंडस्ट्रीज़ द्वारा टेक्सस की एक संघर्षरत तेल रिफाइनरी परियोजना में बड़े निवेश को लेकर हितों के टकराव और राजनीतिक पहुंच से जुड़े गंभीर सवाल उठे हैं। एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग नामक कंपनी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने कथित तौर पर गुप्त हिस्सेदारी ली थी। इसके कुछ महीनों बाद अंबानी समूह की कंपनी ने इस स्टार्टअप में नौ अंकों की रकम का निवेश घोषित किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में जामनगर में अनंत अंबानी और ट्रंप जूनियर की मुलाकात हुई थी। दोनों ने अंबानी परिवार के निजी चिड़ियाघर का दौरा किया और एक गुजराती लोकनृत्य कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।
चार महीने बाद अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग ने रिलायंस से बड़े निवेश की घोषणा की। यह परियोजना अमेरिका में करीब 50 वर्षों में पहली बड़ी नई तेल रिफाइनरी बनाने का दावा करती है, लेकिन कंपनी वर्षों से धन की कमी, देरी, पुनर्ब्रांडिंग और कानूनी विवादों से जूझती रही है।
जांच में कहा गया है कि ट्रंप जूनियर की हिस्सेदारी का आकार और उसके लिए चुकाई गई रकम स्पष्ट नहीं है। कंपनी के अधिकारियों ने संभावित विदेशी निवेशकों के सामने ट्रंप परिवार से संबंधों को अपनी ताकत के रूप में पेश किया और कथित तौर पर संकेत दिया कि निवेश से व्हाइट हाउस तक पहुंच आसान हो सकती है।
हालांकि, ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता ने कहा कि वह केवल निष्क्रिय अल्पसंख्यक निवेशक हैं और कंपनी के संचालन या संघीय सरकार के साथ उसके मामलों में शामिल नहीं हैं। रिपोर्ट को लेकर अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग ने भी दावों को गलत बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किन आरोपों का खंडन कर रही है।
रिलायंस का यह निवेश ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और भारत के संबंधों में सुधार दिखा। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाए थे और रूस से सस्ता तेल खरीदने वाली भारतीय ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बनाया था। बाद में अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार समझौता किया, शुल्क घटाए और रिलायंस को वेनेज़ुएला से तेल खरीदने का लाइसेंस मिलने की भी रिपोर्ट आई।
ईरान युद्ध के बाद भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों से छूट भी दी गई। जांच रिपोर्ट ने निवेश और इन नीति लाभों के बीच संभावित संबंध पर सवाल उठाया है।
रिलायंस ने किसी विशेष या तरजीही व्यवहार से इनकार किया है। कंपनी ने कहा कि अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग में निवेश केवल व्यावसायिक गुणवत्ता, रणनीतिक अनुकूलता और दीर्घकालिक मूल्य के आधार पर किया गया था। व्हाइट हाउस ने भी कहा कि इसमें कोई हितों का टकराव नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंबानी परिवार लंबे समय से ट्रंप परिवार के साथ संबंध मजबूत करता रहा है। रिलायंस ने 2024 में मुंबई की एक संभावित रियल एस्टेट परियोजना के लिए ट्रंप संगठन को एक करोड़ डॉलर का विकास शुल्क दिया था। इवांका ट्रंप अनंत अंबानी के विवाह समारोह में शामिल हुई थीं, जबकि मुकेश अंबानी ने डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वॉशिंगटन में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग की परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता पर भी सवाल हैं। कंपनी के अनुसार, रिफाइनरी बनाने में तीन से चार अरब डॉलर और कई वर्ष लगेंगे। ऊर्जा विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में कहा कि नई रिफाइनरी परियोजनियां बेहद महंगी और कम लाभ वाली होती हैं, इसलिए वॉल स्ट्रीट से धन जुटाना कठिन हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया कि रिलायंस के निवेश से ठीक पहले टेक्सस के पर्यावरण नियामक ने कंपनी के परमिट विस्तार को असामान्य तेजी से मंजूरी दी। आंतरिक ईमेल में अधिकारियों को आवेदन को तुरंत निपटाने के निर्देश दिए गए थे। टेक्सस एजेंसी ने कहा कि आवेदन में दी गई जानकारी की गुणवत्ता के कारण इसे जल्दी मंजूर किया गया।
यह मामला ट्रंप परिवार के निजी व्यावसायिक हितों, विदेशी निवेशकों, सरकारी नीति और व्हाइट हाउस तक संभावित पहुंच के बीच संबंधों को लेकर नए सवाल खड़ा करता है।






















