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एल नीनो से कमजोर हो सकता है भारत का मानसून, 11 साल में सबसे कम बारिश का अनुमान
अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत रही थी, लेकिन खाद्य कीमतों और पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा लागत के दबाव ने आगे की स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।
एल नीनो से कमजोर हो सकता है भारत का मानसून, 11 साल में सबसे कम बारिश का अनुमान
नई दिल्ली में भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए सरकार द्वारा सड़क किनारे स्थापित शीतलन केंद्र पर यात्री विश्राम कर रहे हैं।

भारत में 2026 का मानसून एल नीनो के असर से कमजोर रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल बारिश दीर्घावधि औसत की केवल 90 प्रतिशत रह सकती है, जो 2015 के बाद सबसे कम होगी।

इससे फसलों, खाद्य कीमतों और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत में मानसून सालाना बारिश का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा लाता है और देश की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद अहम है। करीब आधी कृषि भूमि अब भी सिंचाई पर निर्भर नहीं है, जबकि बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने रायटर्स को बताया कि अप्रैल में मानसून को दीर्घावधि औसत के 92 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया गया था, जिसे अब घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सामान्य मानसून वह होता है जिसमें बारिश 50 साल के औसत 87 सेंटीमीटर के 96 से 104 प्रतिशत के बीच रहे।

रविचंद्रन ने कहा कि एल नीनो जल्द विकसित हो सकता है और मानसून के दूसरे हिस्से में इसका असर मध्यम से तेज़ रहने की संभावना है। जून में भी बारिश सामान्य से कम, यानी दीर्घावधि औसत के 92 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है।

कमजोर और असमान बारिश से खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा कि खासकर जुलाई और अगस्त जैसे अहम महीनों में कम बारिश महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है। उनके अनुसार, अगर खाद्य महंगाई तेज़ी से बढ़ी तो औसत महंगाई करीब 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत रही थी, लेकिन खाद्य कीमतों और पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा लागत के दबाव ने आगे की स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।

देश के कई राज्य इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है। आमतौर पर मानसून की बारिश से गर्मी में राहत मिलती है, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ी है। अब इसके दक्षिणी तट तक एक सप्ताह के भीतर पहुंचने की उम्मीद है, जबकि पहले इसके 26 मई तक पहुंचने का अनुमान था।

मानसून आम तौर पर 1 जून के आसपास भारत पहुंचता है और जुलाई के मध्य तक पूरे देश में फैल जाता है। कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों, ग्रामीण आय, जलाशयों, बिजली मांग और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।

स्रोत:reuters
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