भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम यानी LRGB ‘खगांतक-243’ का सफल ड्रॉप ट्रायल किया है।
भारतीय वायुसेना ने बुधवार को खगांतक-243 का सफल परीक्षण किया। यह बम लंबी दूरी से जमीन पर स्थित लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बनाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खगांतक को पहली बार Aero India 2019 में प्रोटोटाइप के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इसे घरेलू और निर्यात, दोनों उपयोगों के लिए कम लागत वाले पेनेट्रेशन हथियार के रूप में पेश किया गया था।
इस हथियार प्रणाली की खासियत यह है कि उपयोगकर्ता की जरूरतों के आधार पर इसमें अलग-अलग पेलोड या सीकर जोड़े जा सकते हैं। इससे इसे विभिन्न तरह के मिशन और लक्ष्यों के अनुसार ढाला जा सकता है।
खगांतक एक यूनिवर्सल एडवांस्ड गाइडेड वेपन्स प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विवादित या उच्च-जोखिम वाले हवाई क्षेत्र में काम कर रहे लड़ाकू विमानों की एयर-टू-सर्फेस हमला क्षमता को मजबूत करना है।
स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम लड़ाकू विमानों को लक्ष्य से दूर रहते हुए हमला करने की क्षमता देते हैं। इससे विमान दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों की सीधी पहुंच से बाहर रहकर सटीक वार कर सकते हैं।

























