बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI से कहा है कि वे आधार अधिनियम, 2016 में संशोधन पर विचार करें, ताकि भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की शीघ्र पहचान, निगरानी और निर्वासन में मदद मिल सके।
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने 27 जुलाई को यह आदेश जारी किया, जिसे मंगलवार को सार्वजनिक किया गया।
अदालत ने कहा कि कुछ विदेशी नागरिकों ने कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए आधार कार्ड हासिल किए, भारतीय पहचान का दावा किया और अपनी वास्तविक पहचान छिपाई।
हाई कोर्ट ने इस मामले में एजेंसियों के बीच समन्वय और दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में कमी की ओर भी इशारा किया। अदालत के अनुसार, इसी खामी के कारण विदेशी नागरिक फर्जी तरीके से आधार कार्ड प्राप्त करने में सफल रहे।
अदालत ने केंद्र और UIDAI से कहा कि वे ऐसे कानूनी और प्रशासनिक उपायों पर विचार करें जिनसे आधार प्रणाली का दुरुपयोग रोका जा सके और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का पता लगाने में एजेंसियों को प्रभावी सहायता मिले।
हाई कोर्ट ने माना कि आधार कार्ड का इस्तेमाल भारतीय पहचान के प्रमाण के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है, इसलिए इसके जारी करने की प्रक्रिया में सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।






















