अनंतनाग के लाल चौक पर हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद सुरक्षा बलों ने घाटी में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई को कुरैशी की उग्रवादियों द्वारा गोली मारकर हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर में 2,500 से 3,500 लोगों को हिरासत में लिया। जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, श्रीनगर में करीब 700, बडगाम में 200 से अधिक, बारामूला में 178, गांदरबल में 100 से अधिक और दक्षिणी जिलों में सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। कई लोगों से पूछताछ कर उन्हें कुछ दिनों बाद छोड़ दिया गया, जबकि कुछ अब भी हिरासत में रहे। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के वकील सजाद फारूक राथर ने कहा कि बिना नए आरोप या नई सामग्री के बार-बार हिरासत को राज्य की असीमित शक्ति नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के अपवाद के रूप में इस्तेमाल होने वाली निवारक नज़रबंदी को संकीर्ण सीमाओं और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के भीतर ही लागू किया जाना चाहिए।
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कश्मीर में पुलिसकर्मी की हत्या के बाद से 2,500 से 3,500 लोग हिरासत में
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के वकील सजाद फारूक राथर ने कहा कि बिना नए आरोप या नई सामग्री के बार-बार हिरासत को राज्य की असीमित शक्ति नहीं माना जा सकता।

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