NASA ने भारत को अपने महत्वाकांक्षी चंद्रमा बेस मिशन में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को कहा कि NASA ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO को अपने “मून बेस प्रोग्राम” से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की नौवीं बैठक 5 और 6 अगस्त को बेंगलुरु स्थित ISRO मुख्यालय में आयोजित की गई थी।
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के बयान के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष सहयोग के विस्तार के साथ-साथ भविष्य में विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक से जुड़े सहयोग पर चर्चा की।
NASA ने अपने चंद्रमा बेस को “मानवता की पहली चंद्र चौकी” बताया है। यह ऐसा स्थान होगा, जहां अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास रहेंगे, काम करेंगे और अन्वेषण करेंगे।
NASA के अनुसार, चालक दल और बिना चालक दल वाले कई मिशनों की श्रृंखला के जरिए अमेरिका और उसके साझेदार चंद्रमा पर स्थायी मानवीय उपस्थिति के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करेंगे।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा पर नई वैज्ञानिक खोजों को बढ़ावा देना और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी करना है।






















