मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भारत ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे “निंदनीय” बताया है। भारत ने वैश्विक व्यापार और समुद्री आवाजाही को बिना किसी बाधा के जल्द से जल्द बहाल करने की जोरदार अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुरुवार को बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि यह मुद्दा भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा, “इस संघर्ष में वाणिज्यिक जहाज़ों को सैन्य हमलों का लक्ष्य बनाए जाने की भारत कड़ी निंदा करता है।”
भारत ने दोहराया कि निर्दोष नागरिक नाविकों की सुरक्षा को खतरे में डालना और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता तथा व्यापार में बाधा डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पूर्ण सम्मान पर भी जोर दिया।
राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि भारत सुरक्षित और निर्बाध समुद्री मार्ग तथा वैश्विक व्यापार की जल्द बहाली की मांग करता है। उन्होंने संघर्ष के दौरान भारतीय नाविकों की मौत पर भी शोक व्यक्त किया।
यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा में “मध्य पूर्व की स्थिति” पर आयोजित बहस के दौरान दिया गया। यह बहस सुरक्षा परिषद में रूस और चीन द्वारा बहरीन-प्रस्तावित उस प्रस्ताव को वीटो किए जाने के बाद बुलाई गई थी, जिसमें हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गई थी।
भारत ने बताया कि 28 फरवरी से ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद से वह लगातार संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करता रहा है। भारत ने संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर भी जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संघर्ष के दौरान अब तक आठ भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है।













