भारत और फ्रांस ने अहम खनिजों के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने की दिशा में नई दिल्ली में भारत-फ्रांस संयुक्त कार्य समूह ऑन क्रिटिकल मिनरल्स की पहली बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी संसाधनों की मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।
यह बैठक 6 जुलाई को हुई। इसकी सह-अध्यक्षता फ्रांस के रणनीतिक खनिज और धातु आपूर्ति मामलों के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधि बेंजामिन गालेजो और भारत के खान मंत्रालय में राष्ट्रीय अहम खनिज मिशन के प्रभारी संयुक्त सचिव कदम संदीप वसंत ने की।
फ्रांसीसी दूतावास की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक में अहम खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों का लक्ष्य बढ़ती वैश्विक मांग और रणनीतिक संसाधनों को लेकर बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच टिकाऊ और विविध आपूर्ति श्रृंखला बनाना है।
दोनों पक्षों के अधिकारियों ने साझा हितों वाले क्षेत्रों की पहचान की और भारत तथा फ्रांस के अलावा उन तीसरे देशों में भी संभावित सहयोगी परियोजनाओं पर चर्चा की, जहां अहम खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं।
बैठक में फ्रांस के भूवैज्ञानिक और खनन अनुसंधान ब्यूरो यानी BRGM और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी GSI के विशेषज्ञ भी शामिल हुए। दोनों एजेंसियों ने अपने लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया।
BRGM और GSI ने संसाधन मानचित्रण, खोज, खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण तक पूरी अहम खनिज मूल्य श्रृंखला की समझ को मजबूत करने के लिए संयुक्त कार्य आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
नई दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा के दौरान बेंजामिन गालेजो ने उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर से भी मुलाकात की। इस बैठक में अहम खनिज सुरक्षा के रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
उन्होंने भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। यह सत्र भारतीय उद्योग परिसंघ यानी CII की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें दोनों देशों की कंपनियों के बीच व्यावसायिक और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
यह यात्रा इस वर्ष फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान अहम खनिजों में सहयोग पर हुए भारत-फ्रांस संयुक्त आशय पत्र के बाद हुई है। उस घोषणा ने खनिज खोज, खनन, अनुसंधान, नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और रणनीतिक खनिजों के पुनर्चक्रण सहित चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सहयोग की नींव रखी थी।
ताजा बैठक यह दिखाती है कि भारत और फ्रांस लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे खनिजों तक सुरक्षित पहुंच को बहुत महत्व दे रहे हैं। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए जरूरी माने जाते हैं।
भारत ने अहम खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय अहम खनिज मिशन के तहत प्रयास तेज किए हैं। इस मिशन का उद्देश्य घरेलू खोज, विदेशों में खनिज साझेदारियों और प्रसंस्करण क्षमताओं को मजबूत करना है।
नई दिल्ली स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और विनिर्माण लक्ष्यों के लिए जरूरी कच्चे माल की सुरक्षा के उद्देश्य से कई देशों के साथ खनिज सहयोग समझौतों पर भी काम कर रही है।
दूसरी ओर, फ्रांस ने दिसंबर 2022 में रणनीतिक खनिजों और धातुओं की आपूर्ति के लिए अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल स्थापित किया था। इसका उद्देश्य रणनीतिक संसाधनों तक पहुंच सुरक्षित करना और औद्योगिक मजबूती को बढ़ाना है।
यह निकाय फ्रांस की ऊर्जा परिवर्तन नीति, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय करता है।















