कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित 9 अरब डॉलर की मेगा पोर्ट और शहर परियोजना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “विकास की भाषा में छिपा विनाश” करार दिया है।
ग्रेट निकोबार द्वीप, जो नई दिल्ली से करीब 3,000 किलोमीटर दूर स्थित है, दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है। इस मार्ग से वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, जिससे इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
सरकार की योजना के तहत 910 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कंटेनर पोर्ट, हवाई अड्डा और शहर विकसित किया जाना है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर प्राचीन वर्षावनों की कटाई होगी और उन आदिवासी समुदायों पर असर पड़ेगा जो सदियों से यहां रह रहे हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो संदेश में कहा, “ग्रेट निकोबार में जो हो रहा है, वह हमारे देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और गंभीर अपराधों में से एक है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के तहत लाखों पेड़ों को काटा जाएगा और लगभग 160 वर्ग किलोमीटर वर्षावन नष्ट हो सकता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके घर छीने जा रहे हैं। गांधी ने इस परियोजना को रोकने के लिए प्रयास करने की बात भी कही।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना को “रणनीतिक, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व” का बताया है। फरवरी में भारत की पर्यावरण अदालत ने इस परियोजना को मंजूरी भी दे दी थी।
पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने पहले कहा था कि यह परियोजना द्वीप के आदिवासी समूहों या पर्यावरणीय संवेदनशीलता के लिए खतरा नहीं है।
द्वीप पर करीब 9,000 लोग रहते हैं, जिनमें लगभग 1,200 आदिवासी शामिल हैं, जैसे निकोबारी और शोम्पेन समुदाय। मानवाधिकार संगठन सर्वाइवल इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि यह परियोजना स्थानीय पर्यावरण और आदिवासी जीवन पर गंभीर असर डाल सकती है।


















