बांग्लादेश की एक अदालत ने 2024 के छात्र नेतृत्व वाले जनविद्रोह के दौरान छह लोगों की हत्या के मामले में पूर्व सत्तारूढ़ अवामी लीग के वरिष्ठ नेता मोहम्मद महबूबुल आलम हनीफ को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई है। इसी मामले में पार्टी के तीन अन्य नेताओं को आजीवन कारावास की सजा दी गई है।
गुरुवार, 29 अक्टूबर को तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने पश्चिमी बांग्लादेश के कुश्तिया जिले में जनविद्रोह के दौरान छह लोगों की हत्या के मामले में चारों नेताओं को दोषी ठहराया।
हनीफ अवामी लीग के संयुक्त महासचिव हैं और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
फैसले के बाद मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने पत्रकारों से कहा कि अदालत ने आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी पाया।
उन्होंने कहा, “दोषियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित हुए हैं।”
न्यायाधिकरण ने दोषियों की अचल संपत्ति का आधा हिस्सा जब्त करने का भी आदेश दिया है।
अभियोजक के अनुसार, जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल 2024 के जनविद्रोह में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए किया जाएगा।
सरकार की ओर से नियुक्त बचाव पक्ष के वकील मोहम्मद आमिर हुसैन ने अदालत के फैसले पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने फैसले को “अस्वीकार्य” बताया।
हनीफ को उनकी अनुपस्थिति में सजा सुनाई गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह वर्तमान में कहां हैं।
अदालत के फैसले के खिलाफ अपील किए जाने के संबंध में भी फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों ने व्यापक जनविद्रोह का रूप ले लिया था।
शुरुआत में छात्रों के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान सरकार की कार्रवाई और बढ़ती हिंसा ने देशव्यापी राजनीतिक संकट पैदा कर दिया था।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2024 के बीच लगभग 1,400 लोग मारे गए थे।
उस समय शेख हसीना की सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगे थे।
अगस्त 2024 में जनविद्रोह के बीच हसीना का लगभग 15 वर्षों का शासन समाप्त हो गया।
इसके बाद वह हेलीकॉप्टर से भारत चली गई थीं, जहां वह अब भी रह रही हैं।




















