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भारतीय वायु सेना प्रमुख अमेरिकी दौरे पर हैं, रक्षा सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा होने की उम्मीद।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत, तेजस लड़ाकू विमान के लिए अमेरिका से एफ404 इंजन की तेज आपूर्ति की मांग कर रहा है।
भारतीय वायु सेना प्रमुख अमेरिकी दौरे पर हैं, रक्षा सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा होने की उम्मीद।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) प्रमुख अमर प्रीत सिंह / AFP
14 घंटे पहले

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सोमवार को एक सप्ताह के अमेरिका दौरे पर रवाना हुए। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। इस संबंध में जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच चल रही परियोजनाओं और भविष्य में रक्षा सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वायुसेना प्रमुख का स्वागत करते हुए उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच मजबूत और लगातार बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत, तेजस लड़ाकू विमान के लिए अमेरिका से एफ404 इंजन की तेज आपूर्ति की मांग कर रहा है। साथ ही, अधिक उन्नत एलसीए एमके-2 कार्यक्रम के लिए एफ414 इंजनों के संयुक्त उत्पादन को लेकर भी बातचीत जारी है।

दरअसल, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने एफ404 इंजनों की आपूर्ति में देरी के चलते अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस पर जुर्माना लगाया है। 99 इंजनों के अनुबंध में देरी की स्थिति में दंड का प्रावधान है, जिसे हर देरी पर लागू किया जा रहा है। ये इंजन 2021 में 48,000 करोड़ रुपये की लागत से ऑर्डर किए गए 83 एलसीए एमके-1ए विमानों के लिए हैं। हालांकि, मार्च 2024 से डिलीवरी शुरू होनी थी, लेकिन अब तक आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।

बाद में नवंबर 2025 में एचएएल ने 97 अतिरिक्त एलसीए एमके-1ए विमानों के लिए 113 एफ404 इंजनों की आपूर्ति का एक और समझौता किया, जिसकी अनुमानित लागत एक अरब डॉलर है। इसके अलावा, भारत में एफ414 इंजनों के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी लगभग एक अरब डॉलर का है, जिसमें 80 प्रतिशत तक तकनीक हस्तांतरण शामिल होगा।

इस बीच, भारतीय वायुसेना की एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ाने के लिए 60 मध्यम परिवहन विमान खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है। इस परियोजना के लिए अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन (सी-130जे सुपर हरक्यूलिस), ब्राज़ील की एम्ब्रेयर (केसी-390 मिलेनियम) और यूरोपीय एयरबस (ए-400एम) के बीच प्रतिस्पर्धा है। लॉकहीड मार्टिन ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ और एम्ब्रेयर ने महिंद्रा के साथ साझेदारी की है, जबकि एयरबस ने अभी तक अपने साझेदार की घोषणा नहीं की है।

गौरतलब है कि भारत ने 2024 में अमेरिका के साथ 3.5 अरब डॉलर का समझौता कर 31 एमक्यू-9बी ड्रोन खरीदने का निर्णय लिया था। इनमें से 15 ड्रोन नौसेना और आठ-आठ ड्रोन सेना तथा वायुसेना को दिए जाएंगे। इनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होने की उम्मीद है।

स्रोत:Others
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