सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा नेता नाजिया इलाही खान द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि मामला “बहुत गंभीर” है, लेकिन पहले पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने पूछा, “आप जनहित याचिका दाखिल कर रहे हैं? यहां क्यों आए हैं? क्या आपने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है?” उन्होंने कहा कि व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए।
मामला एक पॉडकास्ट के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मुंबई और ठाणे में दर्ज शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि खान की टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने धार्मिक भावनाएं भड़काने से संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज भी किए थे। पुलिस जांच को पश्चिम बंगाल ट्रांसफर करने पर विचार कर रही थी, क्योंकि नाजिया इलाही खान वहीं रहती हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि खान की कथित टिप्पणी देशभर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है। हालांकि पीठ ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च स्तर पर निगरानी करने वाली संस्था है, लेकिन वह अन्य प्राधिकरणों का विकल्प नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि निचले स्तर की संस्थाएं काम कर रही हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर हर मामला सीधे शीर्ष अदालत में लाया जाएगा, तो अन्य संस्थाओं की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी।
पीठ ने वकीलों से ऐसे मामलों को सनसनीखेज न बनाने की भी अपील की। न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने गलती की है, तो उसे कानून की पूरी ताकत से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
इस से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को सतर्क रहना चाहिए और मुसलमानों का सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में बहिष्कार करना चाहिए।




















