किसानों, मछुआरों, पोल्ट्री व्यापारियों, वाइन निर्माताओं और ट्रेड यूनियनों से जुड़े कई संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर चल रही बातचीत तत्काल रोकने की मांग की है।
संगठनों ने कहा है कि अमेरिका के साथ FTA से जुड़े प्रस्ताव मजदूरों, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों के खिलाफ हैं।
पत्र में सभी मौजूदा FTA वार्ताओं को निलंबित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही संगठनों ने सभी मुक्त व्यापार समझौतों की व्यापक संसदीय और सार्वजनिक समीक्षा कराने की भी अपील की है।
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने कहा कि व्यापार वार्ताओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और भारत की कृषि, खुदरा व्यापार, श्रमिकों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ‘‘कॉरपोरेट-प्रेरित’’ व्यापार समझौतों से बचाया जाना चाहिए।
संगठनों का कहना है कि ऐसे समझौते किसानों और छोटे उत्पादकों पर गंभीर असर डाल सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आयात बढ़ने से घरेलू उत्पादन और स्थानीय आजीविका पर दबाव बढ़ सकता है।
पत्र में यह भी कहा गया कि कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पोल्ट्री, खुदरा व्यापार और छोटे उद्योगों से जुड़े करोड़ों लोगों की आजीविका को ध्यान में रखे बिना किसी भी बड़े व्यापार समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
संगठनों ने प्रधानमंत्री से मांग की कि सरकार अमेरिका के साथ FTA वार्ता पर आगे बढ़ने से पहले संसद, राज्य सरकारों, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श करे।
उनका कहना है कि व्यापार नीति केवल कॉरपोरेट हितों के आधार पर नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के हितों को केंद्र में रखकर बनाई जानी चाहिए।





















