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पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर चिंता जताई
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि लाखों पाकिस्तानियों की आजीविका के लिए आवश्यक पानी को सीमित करने का कोई भी प्रयास ‘‘बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम’’ होगा।
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर चिंता जताई
बगलिहार में चिनाब नदी के किनारे पानी बह रहा है।

पाकिस्तान ने गुरुवार को चेतावनी दी कि सिंधु जल संधि के तहत उसके हिस्से के पानी के प्रवाह को रोकने या सीमित करने की भारत की किसी भी कोशिश से क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है और इसके गंभीर परिणाम होंगे।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि लाखों पाकिस्तानियों की आजीविका के लिए आवश्यक पानी को सीमित करने का कोई भी प्रयास ‘‘बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम’’ होगा। उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण एशिया और उसके बाहर शांति एवं सुरक्षा को खतरा पैदा होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी भारत पर होगी।

इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए अंद्राबी ने कहा, ‘‘अपने जल संसाधनों के संबंध में पाकिस्तान के अधिकारों और हितों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप उपलब्ध सभी कूटनीतिक, कानूनी, राजनीतिक, आर्थिक और अन्य उपायों के जरिये अपने अधिकारों की मजबूती से रक्षा करेंगे।’’

उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के अस्तित्व और विकास के लिए आवश्यक पानी को जानबूझकर रोकने के किसी भी कदम को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। उनके अनुसार, ऐसा कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत युद्ध की कार्रवाई के समान माना जा सकता है और इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया भारत के जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को पूरी तरह रोकने की दिशा में काम कर रही है।

पाटिल ने एक साक्षात्कार में कहा था कि परियोजनाओं पर समयबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है और आने वाले वर्षों में ‘‘पानी की एक बूंद भी’’ पाकिस्तान नहीं जाने दी जाएगी।

सिंधु जल संधि भारत से निकलकर पाकिस्तान की ओर बहने वाली सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। इस नदी प्रणाली पर दोनों देशों के करोड़ों लोग निर्भर हैं।

भारत ने पिछले वर्ष अप्रैल में भारत प्रशासित कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने की घोषणा की थी। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और भारत ने इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था।

पाकिस्तान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उसके हिस्से का पानी रोकने की किसी भी कोशिश को ‘‘युद्ध की कार्रवाई’’ माना जाएगा। इस्लामाबाद का कहना है कि भारत संधि को एकतरफा रूप से निलंबित नहीं कर सकता।

इसके बाद मई में दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सीमा पार सैन्य झड़पें हुई थीं। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ था।

पिछले महीने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने पश्चिमी नदियों के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की भारत की क्षमता पर लागू प्रमुख सीमाओं की दोबारा पुष्टि की थी।

1960 की सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया था। सतलुज, ब्यास और रावी जैसी तीन पूर्वी नदियों का अधिकार भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी तीन पश्चिमी नदियों के पानी का अधिकांश अधिकार पाकिस्तान को दिया गया।

स्रोत:AA
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