‘हमेशा असहमति जताने वाले’: तुर्किए की बढ़ती नाटो भूमिका इज़राइल को क्यों चिंतित कर रही है?
तुर्की
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‘हमेशा असहमति जताने वाले’: तुर्किए की बढ़ती नाटो भूमिका इज़राइल को क्यों चिंतित कर रही है?जियोनिस्ट राज्य ने गाजा से लेकर लेबनान, सीरिया, यमन और हाल ही में ईरान तक पूरे मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है। यह नाटो राज्य अंकारा के शांतिपूर्ण प्रयासों को भी बाधित करने की सक्रिय कोशिश कर रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट ने हाल ही में अंकारा के ख़िलाफ़ एक भड़काऊ बयान दिया। दाईं ओर, इतामार बेन-गविर, एक कट्टरपंथी इज़राइली मंत्री। / AP
एक दिन पहले

पिछले तीन वर्षों में, इज़रायल ने केवल गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों पर ही हमला नहीं किया बल्कि लेबनान, सीरिया, यमन और हाल‑फिलहाल ईरान जैसे कई संप्रभु मध्य-पूर्वी राज्यों पर भी कार्रवाई की — जिससे यह अस्थिर क्षेत्र में बदमाशी करने वाले के रूप में और अधिक स्थापित हुआ है।

जबकि नाटो सदस्य तुर्किए लंबे समय से यूक्रेन से लेकर गाजा और ईरान तक विभिन्न संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की कोशिश कर रहा है, इज़रायल ने अंकारा के शांतिपूर्ण प्रयासों को नकारने के लिए हर तरह की गंदी चाल आजमाई है।

‘‘इज़रायल का तुर्किए के प्रति शत्रु रवैया खासकर पिछले दो वर्षों में बढ़ा है, जिसने अंकारा की ओर सैन्य स्वर के साथ आक्रामक संदेश भेजे हैं,’’ कहते हैं गोखान बतु, जो अंकारा बेस्ड राजनीतिक विश्लेषक हैं और इज़रायली व मध्य-पूर्वी राजनीति की व्याख्या करते हैं, और वे 7 अक्टूबर, 2023 के बाद से इस अस्थिर क्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थितियों का हवाला देते हैं।

तुर्किए ने तब से इज़रायल की सबसे मुखर आलोचक देशों में से एक का स्थान रखा है, जब तेल अवीव ने गाजा में अपना जनसंहारकारी युद्ध शुरू किया जिसने सैकड़ों हज़ार लोगों की जान ली और इस फ़िलिस्तीनी क्षेत्र को मलबे के ढेर में बदल दिया।

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दुनियाभर में बढ़ती आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, और एक वैश्विक अदालत ने उनके लिए गिरफ्तारी वॉरंट तक जारी किया है।

वे घरेलू स्तर पर भी बढ़ती निंदा झेल रहे हैं, राजनीतिक नेता, सैन्य अधिकारी और जनता युद्धों को राजनीतिक अस्तित्व के साधन के रूप में इस्तेमाल करने पर अपने गुस्से का इज़हार कर रहे हैं।

बतु कहते हैं कि तुर्किए के प्रति इज़रायल की बढ़ती विरोधाभास को हालिया भू-राजनीतिक हलचलों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

‘‘यह व्यवहार तुर्किए की मध्य-पूर्व में बढ़ती क्षमता और क्षेत्र में इज़रायल का संतुलन करने में सक्षम अकेले अभिनेता के रूप में उभार के संदर्भ में बेहतर समझा जा सकता है,’’ बतु TRT World को बताते हैं।

बतु के अनुसार, विकसित होती तुर्किए की रक्षा उद्योग — अत्याधुनिक ड्रोन से लेकर बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं तक, जिन्हें इटली जैसे अन्य देशों ने अपनाया है — ने नेतन्याहू की हार्डलाइन सरकार को बेचैन कर दिया है।

तुर्किए इस गर्मी में एक महत्वपूर्ण नाटो शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जब पश्चिमी गठबंधन को पूर्वी यूरोप से लेकर मध्य-पूर्व तक फैले संघर्षों के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों की पड़ताल करने का मौका मिलेगा।

तुर्किए, जो नाटो में दूसरी सबसे बड़ी सेना है, और ब्रिटेन ने हाल ही में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो अंकारा की अपनी पश्चिमी मित्रों के प्रति सुरक्षा अपील का एक और प्रमाण है।

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बर्सा टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के अकादमिक अली बुरक दरिचिली के अनुसार, इज़रायल तुर्किए की नाटो सदस्यता से खुश नहीं है, क्योंकि यह तेल अवीव को अंकारा की बढ़ती उपस्थिति का सक्रिय रूप से विरोध करने से रोकता है — चाहे वह लीबिया हो, सोमालिया हो या सीरिया।

दरिचिली TRT World को बताते हैं कि इज़रायल की वर्तमान ‘‘तर्कहीन, कट्टर धर्मनिरपेक्ष’’ नेतृत्व की आक्रामक हरकतों के बावजूद, तुर्किए एक तर्कसंगत राजनीतिक अभिनेता के रूप में बनी रहेगी और नेतन्याहू सरकार की उत्तेजनाओं का विभिन्न क्षेत्रों में ‘‘तर्कसंगत तरीके से’’ जवाब देगी।

जहां तुर्किए सोमालिया और इथियोपिया के बीच मध्यस्थता करके सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और दोनों पूर्वी अफ्रीकी राज्यों के बीच मतभेदों को सुलझाने में मदद कर रहा है, वहीं इज़रायल क्षेत्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है और संबंध टूटे हुए क्षेत्र सोमालिलैंड को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की दिशा में जा रहा है।

पूर्वी अफ्रीका की तरह, तुर्किए ने ईरान में भी युद्ध को रोकने और तनाव घटाने के लिए कड़ी मेहनत की है।

सीरिया में भी, जबकि इज़रायल ने दमिश्क की नई नेतृत्व के खिलाफ ड्रूज़ जैसे विभिन्न जातीय और धार्मिक समूहों का समर्थन करते हुए विभिन्न क्षेत्रों पर बमबारी जारी रखी, तुर्किए ने देश के मजबूत केन्द्रीय शासन के साथ एक स्थिर राष्ट्र‑राज्य में रूपांतरण में मदद की।

‘‘यह स्पष्ट है कि तुर्किए की नाटो सदस्यता नेतन्याहू के कट्टर नेतृत्व के लिए एक बड़ी बाधा का प्रतिनिधित्व करती है,’’ बतु कहते हैं। उन्होंने जोड़ा कि इज़रायल की प्रचार कोशिशों के बावजूद, ज़ायोनी राज्य का अंकारा की पश्चिमी गठबंधन में सदस्यता पर कोई अधिकार नहीं है। ‘‘यह एक व्यर्थ प्रयास है।’’

जहां तुर्किए ने सोमालिया से लेकर कोसोवो तक विभिन्न मिशनों में योगदान दिया है, और कोसोवो में वह गठबंधन के शांति मिशन का नेतृत्व भी करता है, वहीं अमेरिका में प्रोस‑इज़रायली लॉब्बी और उनके समर्थक पश्चिमी गठबंधन के अंदर एक एंटी‑टर्की धारणा बनाने के प्रयास में विवादास्पद रिपोर्टें प्रकाशित कर रहे हैं।

‘‘यद्यपि इज़रायल आधिकारिक नाटो सदस्य नहीं है, आलोचनाओं को 'नाटो मानदंडों' के परिप्रेक्ष्य से प्रस्तुत किया जाना संगठन के भीतर आंतरिक बहसों को एक बाहरी अभिनेता द्वारा आकार देने का प्रयास माना जाता है,’’ राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के एक अकादमिक औज़गुर कोरपे कहते हैं।

‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ (प्रो‑इज़रायली) थिंक‑टैंक्स क्षेत्रीय स्तर पर नाटो की सामूहिक खतरा प्राथमिकता को फिर से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं, और तुर्किए की आपत्तियों को, जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के भीतर framed हैं, जानबूझकर 'आंतरिक गठबंधन असहमति' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है,’’ कोरपे TRT World को बताते हैं।

वे कहते हैं कि तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठाना वैश्विक प्रणाली के बहुध्रुवी स्वभाव से अधिक जुड़ा हुआ दिखता है न कि उसकी सैन्य क्षमता से, और वे यह भी जोड़ते हैं कि अंकारा अब शीत युद्ध के दौरान की तरह गठबंधन की दक्षिण-पूर्वी सीमा की रक्षा करने वाला स्थिर अभिनेता नहीं रहा।

‘‘यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जो लोग इसे प्रश्नवाचक बना रहे हैं वे नाटो सदस्य नहीं हैं और केवल कुछ क्रोनिक असंतुष्टों का छोटा समूह मात्र हैं,’’ वे कहते हैं, प्रो‑इज़रायली आवाज़ों का उल्लेख करते हुए।

इज़रायली प्रचार मशीन के बावजूद, केवल तुर्क ही नहीं बल्कि विभिन्न नाटो देशों के पश्चिमी दर्शक भी गाजा में इज़रायल के जनसंहारकारी आचरण और कब्जे वाले वेस्ट बैंक के गांवों व कस्बों में हाल की वासिंदों की हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज़ उठा रहे हैं।

स्पेन और हाल‑फिलहाल इटली, जो दोनों EU सदस्यता वाले नाटो राज्य हैं, ने गाजा से लेकर ईरान युद्ध तक इज़रायली अत्याचारों की तीव्र निंदा की है, दरिचिली कहते हैं, और वे पश्चिमी दुनिया में तेल अवीव के हिंसक व्यवहार के खिलाफ बढ़ती बेचैनी की ओर इशारा करते हैं।

विश्लेषक यह कहते हैं कि ट्रांसअटलांटिक सैन्य गठबंधन ने अतीत में कई परेशानियों का सामना किया है और इज़रायल द्वारा की गई ऐसी अस्थिरता पैदा करने वाली कार्रवाइयों तथा रक्षा आवंटनों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय राजधानीयों के बीच मतभेदों का भी वह सामना करेगा।

दरिचिली, जो एक पूर्व तुर्क खुफिया अधिकारी भी हैं, के अनुसार, बढ़ती तनातनी के बावजूद, नाटो समग्र रूप से इज़रायल के आक्रामक रवैये और ईरान युद्ध के प्रति ‘‘तर्कसंगत’’ प्रतिक्रिया देने की उम्मीद है।

‘‘तुर्किए की बिना भागीदारी के यूरोप का एक वास्तविक सुरक्षा वास्तुकला नहीं हो सकता। इज़रायल नाटो का भविष्य तय नहीं कर सकता।’’

तुर्क अकादमिक का कहना है कि क्षेत्र में इज़रायल की विस्तारवादी नीतियों ने अपनी सीमाएं छू ली हैं क्योंकि नौ मिलियन की आबादी वाला यह देश बहु मोर्चों पर लड़ाईयों से थका हुआ नज़र आता है, और वह ईरान के विभिन्न इज़रायली शहरों पर किए गए खतरनाक हमलों का उल्लेख करते हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता

विशेषज्ञ इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि तुर्क नेतृत्व, जो अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में एंटी‑तुर्किए इज़रायली प्रचार से भली भांति परिचित है, ने पहले ही अपनी राजनीतिक दिलचस्पियों को विभिन्न क्षेत्रों में सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपना ली है।

नाटो सदस्यता के अलावा, जो अंकारा को ‘‘एक महत्वपूर्ण लीवरेज’’ प्रदान करती है, तुर्किए की सबसे बड़ी संपत्ति उसका अपना राष्ट्रीय शक्ति आधार और राजनीतिक व सैन्य क्षमता है, जो रक्षा उद्योग से लेकर उत्तरोत्तर बढ़ती पहुंच तक, उत्तरी अफ्रीका से अज़रबैजान और पाकिस्तान तक उसके प्रभाव को दर्शाती है, बतु कहते हैं।

जबकि अमेरिका में प्रोस‑इज़राइली आवाज़ें और ज़ायोनी राज्य के पूर्व प्रधानमंत्री नाफ़्ताली बेनेट जैसे बड़े राजनेता यूरोएशियाई भूगोल में तुर्किए की बढ़ती राजनीतिक अपील को कमज़ोर करने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं — चाहे वह पूर्वी यूरोप हो, मध्य‑पूर्व, काकेशस या मध्य एशिया — अंकारा अपने मार्ग पर आगे बढ़ने में हिचकिचाहट नहीं दिखा रहा है।

‘‘तुर्किए संभवत: इज़राइल की संभावित घेराबंदी और अलगाव रणनीति का जवाब अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को और गहरा करके देगी,’’ कोरपे कहते हैं।

कोरपे कहते हैं कि अंकारा इज़राइल के शत्रुता‑पूर्ण रुख और अन्य नकारात्मक क्षेत्रीय समीकरणों के खिलाफ एक सक्रिय विदेश नीति के साथ जवाब दे रहा है जो तुर्किए को बाहर रखने की कोशिश कर सकते हैं।

‘‘तुर्किए ऐसे पहलों का मुकाबला करने के लिए नाटो के भीतर अपनी संस्थागत स्थिति और अपने भू‑राजनीतिक वजन का राजनयिक लीवरेज के रूप में उपयोग करती रहेगी।’’

स्रोत:TRT World
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