प्रमुख कश्मीरी धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। बैठक में फिलिस्तीन, लेबनान और अन्य क्षेत्रों में लोगों की पीड़ा तथा बढ़ते इस्लामोफोबिया के बीच मुस्लिम एकता की जरूरत पर जोर दिया गया।
मीरवाइज ने रविवार को एक्स पर जारी बयान में बताया कि यह मुलाकात नई दिल्ली में हुई, जहां ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस सप्ताहांत BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।
बैठक में भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहअली भी मौजूद थे।
मीरवाइज ने कहा कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति के सामने यह बात रखी कि मुस्लिम उम्माह के भीतर एकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्षों और सांप्रदायिक मतभेदों को मुसलमानों को बांटने नहीं देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ते इस्लामोफोबिया और ईरान, फिलिस्तीन, लेबनान व अन्य जगहों पर लोगों पर हो रही भारी पीड़ा के बीच मुस्लिम एकता सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।
मीरवाइज के साथ कश्मीरी शिया नेता आगा सैयद हसन मौसवी और इमरान रजा अंसारी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के साथ युद्ध के बीच ईरान के लोगों के प्रति एकजुटता भी जताई और देश पर जारी “आक्रामकता” समाप्त करने की मांग की।
मीरवाइज ने कहा कि टकराव से मुद्दों का समाधान नहीं हो सकता। उनके अनुसार, आगे बढ़ने का अंतिम रास्ता संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही निकलता है।
उन्होंने कश्मीर और ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए ईरानी राष्ट्रपति को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद का अखरोट की लकड़ी से बना विशेष मॉडल भेंट किया।


















