भारत और अमेरिका की सेनाओं ने वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण शुरू कर दिया है। इस बार अभ्यास का मुख्य फोकस हाई-एल्टीट्यूड वारफेयर, लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन और बेहतर ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह अभ्यास 9 सितंबर से 28 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें अमेरिका की फोर्ट वेनराइट, अलास्का स्थित 11वीं एयरबोर्न डिविजन के आर्कटिक-प्रशिक्षित सैनिक भी हिस्सा ले रहे हैं।
इन सैनिकों की भागीदारी भारत में ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध प्रशिक्षण और संयुक्त अभियानों की तैयारी को मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
अमेरिकी सेना की तीसरी मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स यानी 3MDTF भी इस द्विपक्षीय अभ्यास में शामिल होगी। इस यूनिट की भागीदारी से लंबी दूरी की प्रिसिजन फायर क्षमता, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन और आधुनिक युद्धक्षेत्र में समन्वित कार्रवाई पर जोर बढ़ेगा।
‘युद्ध अभ्यास’ भारत और अमेरिका के बीच नियमित सैन्य सहयोग का प्रमुख हिस्सा है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल, संयुक्त संचालन क्षमता और कठिन परिस्थितियों में साथ काम करने की तैयारी को मजबूत करना है।






















