यूरोपीय संघ और छह साझेदार देशों ने सोमवार को बहुपक्षवाद के लिए साझेदार यानी P4M पहल की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को बढ़ावा देना और शांति व साझा समृद्धि के लिए नए प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
यह पहल संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के इतर शुरू की गई। शुरुआती सह-प्रायोजकों के रूप में ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, भारत और केन्या यूरोपीय संघ के साथ शामिल हुए।
P4M शिखर बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों के देशों ने हिस्सा लिया और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, संघर्षों तथा जलवायु परिवर्तन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
संयुक्त घोषणा में प्रतिभागियों ने बढ़ते ध्रुवीकरण, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन, संरक्षणवाद, दबाव की राजनीति और बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये प्रवृत्तियां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को कमजोर करती हैं।
घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व को दोहराया गया।
प्रतिभागियों ने बहुपक्षीय संस्थाओं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग की, ताकि उन्हें अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और संघर्षों, मानवीय संकटों, सतत विकास तथा उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया जा सके।
घोषणा में पेरिस समझौते और 2030 सतत विकास एजेंडा के समर्थन की बात भी कही गई। साथ ही वैश्विक व्यापार, वित्त, डिजिटल परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य पर मजबूत सहयोग का संकल्प लिया गया।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष अंतोनियो कोस्टा ने कहा, “आज की बैठक ने एक महत्वपूर्ण बात दिखाई है: बढ़ते विभाजन की दुनिया में भी सहयोग के प्रति मजबूत साझा प्रतिबद्धता मौजूद है।”
उन्होंने कहा, “यह प्रतिबद्धता महाद्वीपों, क्षेत्रों और राजनीतिक परंपराओं से परे फैली हुई है। आगे का रास्ता आसान नहीं होगा, लेकिन आज हमने दिखाया है कि हम इसे अकेले नहीं चल रहे हैं।”




















