भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सरकार और चुनाव आयोग से मतदाता सूची के बड़े पैमाने पर संशोधन से जुड़े फैसलों पर जवाब मांगा। इस संशोधन को लेकर विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संशोधन प्रक्रिया के दौरान लाखों नाम मतदाता सूचियों से गलत तरीके से हटाए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है।
आलोचकों ने ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की BJP के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
हालांकि ECI ने किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, ECI और ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किए।
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की उम्मीद है। याचिकाओं में से एक में ECI के रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके फैसले संवैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप थे या नहीं।
अदालत ने कहा कि अखबारों की रिपोर्ट “100 प्रतिशत सही, आंशिक रूप से सही या गलत” हो सकती हैं, इसलिए आज उनके आधार पर आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि वह जवाब जरूर चाहती है और अगर पाया गया कि कानून का पालन नहीं हुआ, तो उसे बदला जा सकता है।
ECI का कहना है कि पिछले साल शुरू हुई संशोधन प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी तरीके से पंजीकृत मतदाताओं की पहचान करना और “विदेशी अवैध प्रवासियों” को मतदान से रोकना है।



















