कश्मीरी कार्यकर्ता शकील अहमद भट की पुरानी तस्वीरों को कई सालों से इस्लाम विरोधी इंटरनेट पर इस्तेमाल करते आए हैं। डॉ. इयाद अल-कुनैबी का कहना है कि इन तस्वीरों के पीछे एक इंसान, एक परिवार और कश्मीर की राजनीतिक हिंसा से जुड़ी एक लंबी कहानी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया गया। शकील अहमद भट कश्मीर के एक कार्यकर्ता हैं, जो कश्मीर में मुसलमानों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि 1947 से कश्मीर में मुसलमानों को मस्जिदों की बंदी, हत्याओं, गिरफ्तारियों और दमन जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है। डॉ. अल-कुनैबी के अनुसार मीडिया इंटरव्यू में शकील ने दावा किया था कि हिरासत के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया और बिजली के झटके दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके हाथ में लगी चोट के कारण वे सामान उठाने में असमर्थ हो गए और आर्थिक रूप से अपने भाइयों पर निर्भर हो गए।
उनके अनुसार, उन्हें खिड़की से फेंका गया, जिससे उनकी रीढ़ टूट गई और कुछ वर्षों बाद कम उम्र में उनकी मौत हो गई। शकील के पिता को लेकर भी दावा किया गया कि उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उनकी टांग टूट गई और वे जीवनभर बिस्तर पर पड़े रहे। जून 2020 में शकील के भाई हिलाल की मौत हुई, उस समय शकील जेल में थे और अपने परिवार से अलग थे। वायरल हुई दो तस्वीरों के संदर्भ को लेकर समर्थकों ने कहा कि ऊपरी तस्वीर 19 जून 2007 की है, जब शकील एक जनाजे के जुलूस में शामिल थे और कश्मीर की आजादी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। दूसरी तस्वीर 22 जून 2007 की बताई गई है। उस दिन शकील ब्रिटेन की महारानी द्वारा सलमान रुश्दी को नाइटहुड दिए जाने के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि रुश्दी की किताब पैगंबर इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक थी।


























