चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को भारत से द्विपक्षीय संबंधों में आई “सकारात्मक गति” को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मामलों में समन्वय एवं सहयोग बढ़ाने की अपील की।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, वांग यी ने यह टिप्पणी फिलीपींस की राजधानी मनीला में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान की। मनीला में शुक्रवार तक आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक और उससे जुड़ी बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को बड़े देशों के रूप में जिम्मेदारी का भाव दिखाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुध्रुवीयता तथा अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने में सकारात्मक योगदान देना चाहिए।
उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता को चीन का समर्थन देते हुए कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली को समन्वय और सहयोग मजबूत करना चाहिए, ताकि व्यापक BRICS सहयोग तंत्र को आगे बढ़ाया जा सके और विकासशील देशों के साझा हितों का बेहतर प्रतिनिधित्व व संरक्षण हो सके।
वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच सामान्य संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति अनिवार्य शर्त है। भारत मानता है कि स्थिर और सहयोगी संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व में मूल्यवान योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन जैसे दो बड़े और महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों के अपने-अपने हित होना स्वाभाविक है, लेकिन दोनों देशों के नेताओं ने सहमति जताई है कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार संतुलन और आपूर्ति श्रृंखला की पूर्वानुमेयता शामिल हैं।
जयशंकर ने आधिकारिक और जन-से-जन संपर्कों को आसान बनाने तथा विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों और मंचों के जरिए बैठकों को आगे बढ़ाने की भी बात कही।




















