चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि बीजिंग और नई दिल्ली को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए।
बीजिंग में भारत के निवर्तमान राजदूत प्रदीप कुमार रावत से मुलाकात के दौरान वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को “खतरे” के बजाय “विकास के अवसर” के रूप में देखना चाहिए।
वांग ने कहा कि चीन भारत के साथ “पारस्परिक लाभ” वाले सहयोग को बढ़ाने, ग्लोबल साउथ के साझा हितों की रक्षा करने और BRICS जैसे मंचों के जरिए बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में हालिया सकारात्मक रुझान को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
वहीं, रावत ने भी भारत की ओर से सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
अलग बातचीत में वांग यी ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से फोन पर कहा कि अमेरिका और ईरान को बातचीत के रास्ते पर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर दिया कि ईरान के परमाणु मुद्दे का समाधान केवल संवाद से संभव है और बल प्रयोग से स्थिति और बिगड़ सकती है।












