भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि वैश्विक संघर्षों का असर अब समुद्री सुरक्षा पर सीधे पड़ रहा है और भौगोलिक दूरी किसी भी देश को इससे बचा नहीं सकती। उन्होंने मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता को समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताया।
नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में बोलते हुए त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां प्रतिस्पर्धा अब सीधे टकराव में बदलती जा रही है। उन्होंने कहा कि “सुरक्षा आपस में जुड़ी, लगातार बनी रहने वाली और कठोर वास्तविकता है,” और पिछले पांच वर्षों में हालात “प्रतिस्पर्धा के दौर” से “संघर्ष के दौर” में बदल गए हैं।
नौसेना प्रमुख ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किसी भी व्यवधान से वैश्विक तेल कीमतों और बीमा लागत में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना फारस की खाड़ी से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है और क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए हुए है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि आधुनिक युद्ध के तीन प्रमुख पहलू—गति, पैमाना और एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई—अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने यह भी चेताया कि “नैरेटिव वॉरफेयर” यानी सूचना और धारणा के जरिए युद्ध का असर बढ़ रहा है, जो जमीनी लड़ाई से परे जाकर फैसलों को प्रभावित करता है।
उन्होंने मध्य पूर्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणालियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय इंसानों के हाथ में ही रहेगा।
सम्मेलन में संयुक्त संचालन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, रखरखाव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वदेशीकरण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। नौसेना प्रमुख ने बदलते खतरों से निपटने के लिए तकनीकी अनुकूलन और वैश्विक साझेदारी को जरूरी बताया।














