ईरान ने कहा है कि वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ के लिए एक तंत्र विकसित करेगा, जबकि अब तक इस मार्ग से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों से कोई शुल्क नहीं लिया गया है। यह जानकारी नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने सोमवार को दी।
पत्रकारों से बातचीत में फतहली ने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को ईरान अपने क्षेत्रीय जल के रूप में देखता है, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा, “हम निकट भविष्य में सभी देशों के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराएंगे।”
राजदूत ने स्पष्ट किया कि इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकरों ने अब तक ईरान को कोई टोल नहीं चुकाया है। उन्होंने कहा, “आप भारतीय सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई शुल्क लिया है।”
रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि 20 मार्च के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के तहत करीब 20 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल भारत पहुंचा है। भारत ने वर्ष 2019 में ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया वार्ता पर भी राजदूत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मांगें “गैरकानूनी” हैं और यदि वॉशिंगटन ईरान की शर्तें मानता है तो तेहरान बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान युद्ध के लिए भी तैयार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी की घोषणा के बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। एक समुद्री खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, यह नाकाबंदी सोमवार को 1400 GMT से प्रभावी होने वाली है।
दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है। हालांकि, इस सप्ताहांत इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और बढ़ गया है।


















