संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक समुद्री मार्गों में बाधा, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका, अंतरराष्ट्रीय शांति, आर्थिक स्थिरता और विकासशील देशों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री सुरक्षा पर आयोजित उच्चस्तरीय खुली बहस को संबोधित करते हुए अहमद ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक विकास और वैश्विक सुरक्षा लक्ष्यों के लिए भी बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “वैश्विक समुद्री क्षेत्र 21वीं सदी की चुनौतियों का प्रमुख भू-रणनीतिक मंच हैं। ये वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा हैं और पृथ्वी के पर्यावरण के संकेतक भी।”
अहमद ने कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं निर्बाध समुद्री व्यापार पर काफी हद तक निर्भर हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधान इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि समुद्री अस्थिरता किस तरह वैश्विक संकट में बदल सकती है।
उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना और उसके कारण खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा पर असर, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।”
पाकिस्तानी राजदूत ने चेतावनी दी कि तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे शुरुआती झटके आगे चलकर महंगाई, धीमी आर्थिक वृद्धि और भुगतान संतुलन के संकट जैसी व्यापक समस्याओं में बदल सकते हैं, जिनका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कूटनीति और संवाद के माध्यम से तनाव कम करने के पक्ष में है। अहमद ने बताया कि पाकिस्तान, चीन, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे साझेदार देशों के साथ मिलकर तनाव कम करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, “इस संकट के स्थायी समाधान को सुगम बनाने के अपने निरंतर प्रयासों में पाकिस्तान कूटनीति और संवाद में अपने विश्वास पर कायम है और इस दिशा में हर संभव कदम उठाता रहेगा।”
अहमद ने यह भी रेखांकित किया कि समुद्री सुरक्षा केवल नौवहन मार्गों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, समुद्र के भीतर की बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा और समुद्र में मानवाधिकारों की रक्षा भी शामिल है।
उन्होंने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) को वैश्विक समुद्री व्यवस्था की आधारशिला बताते हुए सभी देशों से इसके सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के अंत में अहमद ने समुद्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को फिर से मजबूत करने का आह्वान किया।
















