बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने पर एक SDPI नेता के खिलाफ जारी निष्कासन आदेश को लेकर मुंबई पुलिस की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने सवाल उठाया कि केवल सरकार विरोधी नारे लगाने के आधार पर किसी नागरिक के खिलाफ ऐसी कार्रवाई कैसे की जा सकती है।
जस्टिस माधव जे. जामदार ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिकों को सरकार का “गुलाम” नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि नागरिकों को विरोध करने और आंदोलन करने का अधिकार है।
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अदालत ने कहा, “यह क्या है? सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हुए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे तो आप उन पर केस लगा देंगे? यह क्या है? विरोध करना नागरिकों का अधिकार है।”






















