भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हालिया छात्र-युवा प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए 18 वर्ष से कम उम्र के उन छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस ज्यादती के आरोप निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते दिखाई देते हैं। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार, अदालत ने अधिकारियों को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई करने से भी रोका।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा जो भी डिजिटल डेटा इकट्ठा किया गया है, उसे सुरक्षित रखा जाए, लेकिन सार्वजनिक डोमेन में न लाया जाए।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले सप्ताह इस्तीफा दे दिया था।
सरकार से बातचीत और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। संगठन ने कहा था कि उसकी सभी मांगें मान ली गई हैं।
हालांकि, आंदोलन समाप्त होने के बाद भी देश के कई हिस्सों से प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं की हिरासत की खबरें सामने आईं। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का आदेश अहम माना जा रहा है।
CJP और छात्र संगठनों ने लगातार मांग की थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए।





















