भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को पिछले साल मई में हुए सीमा पार संघर्ष की पहली बरसी मनाई। यह संघर्ष चार दिनों तक चला था और 10 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्षविराम की घोषणा के बाद थम गया था।
मई 2025 में हुई यह लड़ाई 22 अप्रैल को भारत प्रशासित कश्मीर के पहलगाम पर्यटक स्थल पर हुए हमले के बाद शुरू हुई थी। इस हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हुई थी।
नई दिल्ली ने इस हमले के लिए इस्लामाबाद को ज़िम्मेदार ठहराया था, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
इसके बाद भारत ने 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कई ठिकानों को निशाना बनाया।
जवाब में पाकिस्तान ने “ऑपरेशन बुनयानुन मरसूस” या “आयरन वॉल” शुरू किया, जिसके तहत भारत प्रशासित कश्मीर और भारत के अंदर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि भारतीय सेना ने “पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया।”
उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया।
वहीं पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR ने इस संघर्ष को देश के सैन्य इतिहास का “निर्णायक अध्याय” बताया।
ISPR ने कहा कि इस संघर्ष ने राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मज़बूत किया, संस्थागत संकल्प की पुष्टि की और पाकिस्तान वायु सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि को प्रमाणित किया।
पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू ने कहा कि पाकिस्तान वायु सेना ने अपनी क्षमता, दृढ़ता और प्रभुत्व का प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया कि यह “हवाई युद्ध के इतिहास में पहली बार” था जब पूर्ण स्पेक्ट्रम मल्टी-डोमेन ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
पाकिस्तान का दावा है कि झड़पों के दौरान उसने भारतीय बलों के चार फ्रांसीसी निर्मित राफेल लड़ाकू विमान, एक मिराज 2000, एक सुखोई-30, एक मिग-29 और एक हेरॉन ड्रोन को मार गिराया था।
भारत ने नुकसान की बात स्वीकार की थी, लेकिन संख्या स्पष्ट नहीं की। हालांकि नई दिल्ली ने दावा किया कि उसने पाकिस्तानी विमानों को नुकसान पहुंचाया, जिसे इस्लामाबाद ने खारिज किया।
ISPR ने कहा कि पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाएं बदलते भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल तथा विरोधी ताकतों की आक्रामक क्षमताओं से पूरी तरह अवगत हैं।














