कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच कथित संबंधों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री के प्रकाशन, अपलोड करने और साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मानहानि से जुड़े एक मामले में यह आदेश पारित किया है।
समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार, अदालत का आदेश अगले वर्ष 31 जनवरी तक प्रभावी रहेगा।
यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि संबंधित वीडियो में उसके खिलाफ झूठे और मानहानिकारक दावे किए गए हैं।
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने तकनीकी उद्यमी सबीर भाटिया और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अदालत का रुख किया था।
कंपनी का आरोप है कि सबीर भाटिया ने कथित तौर पर यह वीडियो बनाया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अडानी के बीच संबंधों को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
याचिका में कंपनी ने डॉक्यूमेंट्री के प्रसार पर रोक लगाने और कथित मानहानि के लिए हर्जाने की मांग की थी।
अडानी एंटरप्राइजेज के वकील ने अदालत को बताया कि वीडियो में कंपनी के खिलाफ कई ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें कंपनी झूठा मानती है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आर्यक दत्त ने वीडियो की प्रकृति पर टिप्पणी की।
अदालत ने कहा, “विवादित वीडियो न तो कोई समाचार रिपोर्ट है और न ही किसी कार्यवाही का विवरण।”
अदालत के अनुसार, वीडियो एक नाटकीय प्रस्तुति है, जिसके शीर्षक में स्पष्ट रूप से चोरी का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति दत्त ने कहा कि वीडियो में इस्तेमाल किए गए दृश्य और कथात्मक विवरण को वास्तविक तथ्यों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अदालत की यह टिप्पणी वीडियो में लगाए गए आरोपों की प्रस्तुति और उसके संभावित मानहानिकारक प्रभाव से संबंधित थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों को वीडियो हटाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “प्रतिवादी विवादित वीडियो और उसके ऐसे किसी भी क्लिप, अंश या पुनर्प्रकाशन को तत्काल हटाएं या हटवाएं, जिनमें इस प्रकार के मानहानिकारक बयान शामिल हों।”
यह निर्देश प्रतिवादियों के स्वामित्व या नियंत्रण वाले सभी सोशल मीडिया अकाउंट, चैनल और पेज पर लागू होगा।
अदालत ने वीडियो के प्रकाशन, अपलोड करने और साझा किए जाने पर भी रोक लगाई है।























