ब्रिक्स देशों के संसदीय नेताओं ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है। नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन पर जारी संयुक्त घोषणा में फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय, स्वतंत्रता और एक स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र की स्थापना के अधिकार को दोहराया गया।
मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय बैठक के बाद ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने पश्चिम एशिया में जारी शत्रुता और तनाव बढ़ने पर चिंता जताई।
संयुक्त घोषणा में एकतरफा दबावकारी उपायों और आर्थिक प्रतिबंधों की भी आलोचना की गई। प्रतिनिधियों ने ऐसे प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत बताया।
ब्रिक्स संसदीय मंच की संयुक्त घोषणा में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो-राष्ट्र व्यवस्था की आवश्यकता दोहराई गई।
इस व्यवस्था के तहत इजरायल और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की परिकल्पना की जाती है।
घोषणा में फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार पर विशेष जोर दिया गया।
ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने फिलिस्तीनियों की स्वतंत्रता और एक संप्रभु राष्ट्र की स्थापना के अधिकार को मान्यता देने की आवश्यकता रेखांकित की।
बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ती शत्रुता और सैन्य तनाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
संसदीय नेताओं ने क्षेत्र में संघर्षों के विस्तार और उनके संभावित परिणामों को लेकर चर्चा की।
संयुक्त घोषणा में क्षेत्रीय परिस्थितियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया गया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अंश में पश्चिम एशिया के किसी विशेष सैन्य अभियान या संबंधित देश के खिलाफ नए प्रतिबंधात्मक कदम की घोषणा का उल्लेख नहीं है।
ब्रिक्स देशों के संसदीय नेताओं ने पश्चिम एशिया में लागू किए गए एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और दबावकारी उपायों पर भी आपत्ति जताई।
संयुक्त घोषणा में ऐसे कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया गया।
ब्रिक्स देशों ने पहले भी वैश्विक मामलों में बहुपक्षीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय कानून की भूमिका को महत्व देने पर जोर दिया है।
मंगलवार की घोषणा में भी एकतरफा उपायों के बजाय अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप व्यवस्था का समर्थन किया गया।





















