भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत की “प्राथमिक चिंता” आतंकवाद है और अगर साझेदार देश इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते या महत्व नहीं देते, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।
81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में एक थिंक टैंक द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों पर बात की।
जयशंकर ने कहा कि भारत के पड़ोस से पैदा होने वाला आतंकवाद नई दिल्ली की प्रमुख चिंताओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि अगर भारत के साझेदार इस चिंता को गंभीरता से नहीं लेते या उसे पर्याप्त महत्व नहीं देते, तो यह स्वाभाविक रूप से संबंधों में दिखाई देगा।
अमेरिका के साथ रिश्तों को “बेहतर रास्ते” पर ले जाने के लिए क्या किया जाना चाहिए, इस सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन दोनों देशों के सामने मौजूद मुद्दों को संबोधित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “अगर मैं पीछे मुड़कर अमेरिका के साथ संबंधों को देखूं, तो पाता हूं कि दुनिया के बड़े हिस्से के लिए अमेरिका के साथ रिश्ते अधिक कठिन रहे हैं। यह शायद सांत्वना न हो, लेकिन यह वास्तविकता है।”
जयशंकर ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के संबंध ऊपर की ओर बढ़ते रहेंगे।


























