विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के दौरान रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने वाले अमेरिकी कानून पर भारत की चिंताएं रखीं।
जयशंकर ने अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्होंने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानूनको लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया।
उन्होंने बताया कि बैठक में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन से जुड़े घटनाक्रमों पर भी चर्चा हुई।
रुबियो ने अलग से X पर कहा कि अमेरिका और भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पिछले सप्ताह इस कानून को 262-159 मतों से मंजूरी दी थी। बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस अधिनियम पर हस्ताक्षर कर दिए।
इस कानून के तहत ट्रंप प्रशासन को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
नई दिल्ली ने इससे पहले कहा था कि इस कानून के “संभावित प्रभाव” केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकते हैं।
अमेरिका और भारत ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार विवाद समाप्त करने के उद्देश्य से एक अंतरिम रूपरेखा समझौते की घोषणा की थी।
पिछले साल दोनों देशों के बीच तनाव उस समय बढ़ा था, जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए थे। इसका एक कारण रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को बताया गया था।


























