भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों ने रविवार, 1 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में विशाल विरोध रैली आयोजित की। रामलीला मैदान में हुए प्रदर्शन में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए किया जा रहा है।
रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया।
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “देश की आवाज कह रही है कि हम भारत के लोकतंत्र और संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मोदी सरकार संविधान से बड़ी नहीं है। संविधान सबसे ऊपर है।”
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
'लोकतंत्र पर हमला हो तो चुप रहना विकल्प नहीं': कांग्रेस
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान के अधिकार की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
पार्टी ने कहा, “जब लोकतंत्र पर हमला हो रहा हो, तब चुप रहना कोई विकल्प नहीं है।”
कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
विपक्षी नेताओं ने मांग की कि मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और चुनाव आयोग जवाबदेही सुनिश्चित करे।
गठबंधन ने इस मुद्दे पर आगे भी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।
'लड़ाई देश के मतदाताओं और धोखा देने वालों के बीच है': तेजस्वी यादव
बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने भी रैली को संबोधित करते हुए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लोकतंत्र से जोड़ा।
उन्होंने कहा, “यह लड़ाई देश के मतदाताओं और धोखा देने वालों के बीच है।”
तेजस्वी यादव ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “इसीलिए हमें देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आना होगा। ऐसे लोगों को सबक सिखाना होगा।”
रामलीला मैदान में एकत्र प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
विपक्षी दलों का आरोप है कि कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
सितंबर में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण से संबंधित कुछ फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष चिंताएं जताई थीं।
इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन तेज हुए।
हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से हटाए जाने के आरोपों से इनकार किया है।
निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR, कराया है।
इस प्रक्रिया का घोषित उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन करना, पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाना है।
हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम भी हटाए गए, जो मतदान करने के पात्र थे।
विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं, निर्वाचन अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।





















