बढ़ती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने नौसेना के लिए नई पीढ़ी के अत्याधुनिक स्टेल्थ विध्वंसक युद्धपोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने प्रोजेक्ट 18A के तहत इन युद्धपोतों के निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नए युद्धपोतों को उन्नत सेंसर और आधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस करने की योजना है। हालांकि, परियोजना की जटिलता और व्यापक पैमाने को देखते हुए इनकी आपूर्ति शुरू होने में कई वर्ष लग सकते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में प्रोजेक्ट 18A के तहत भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किए जाने वाले विध्वंसक युद्धपोतों को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की।
यह परियोजना भारतीय नौसेना के अगले चरण के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है।
इसके तहत ऐसे युद्धपोत विकसित किए जाने हैं, जो समुद्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।
हालांकि, सैद्धांतिक मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि युद्धपोतों के निर्माण के लिए अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
स्टेल्थ तकनीक का उद्देश्य युद्धपोतों को दुश्मन की निगरानी और पहचान प्रणालियों के लिए अपेक्षाकृत कम दिखाई देने वाला बनाना होता है।
इस तरह के युद्धपोतों के डिजाइन में रडार और अन्य सेंसरों द्वारा उनकी पहचान की संभावना कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
नई पीढ़ी के विध्वंसक युद्धपोतों को उन्नत सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस किया जाएगा।
इनका उद्देश्य नौसेना की समुद्री निगरानी, रक्षा और युद्ध संबंधी क्षमताओं को मजबूत करना है।
हालांकि, प्रस्तावित युद्धपोतों में इस्तेमाल होने वाले विशिष्ट हथियारों, रडार प्रणालियों और अन्य तकनीकी उपकरणों का विस्तृत विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
प्रोजेक्ट 18A के तहत प्रस्तावित युद्धपोतों के निर्माण में लंबा समय लगने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के बाद युद्धपोतों की आपूर्ति शुरू होने में लगभग पांच से दस वर्ष लग सकते हैं।
इसकी प्रमुख वजह परियोजना का व्यापक पैमाना और तकनीकी जटिलता है।
इसलिए इन युद्धपोतों के निकट भविष्य में नौसेना में शामिल होने की संभावना नहीं है।
परियोजना के लिए अंतिम अनुबंध, निर्माण कार्यक्रम और आपूर्ति की निश्चित तारीखें अभी घोषित नहीं की गई हैं।





















