ईरान की राजधानी तेहरान में पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को लेकर भारत ने कहा है कि वह क्षेत्र में हो रहे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रहा है। यह बैठक मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और सऊदी अरब तथा यमन के हूती समूह के बीच संघर्षविराम की संभावनाओं के बीच हुई है।
बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत क्षेत्र में होने वाले उन सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर नजर रखता है, जिनका उसके हितों पर प्रभाव पड़ सकता है।
समाचार एजेंसी एएनआई के सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा, “हम क्षेत्र में हो रहे उन सभी महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखते हैं, जिनका हमारे हितों पर असर पड़ता है।”
इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है।
बताया जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और सऊदी अरब तथा यमन के हूती समूह के बीच संघर्षविराम की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान इन वार्ताओं में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल से जुड़े क्षेत्रीय तनाव के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
हूतियों को एक अरब डॉलर देने की चर्चा
इजरायली मीडिया ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सऊदी अरब ने अपने खिलाफ हमले रोकने के प्रयासों के तहत हूती समूह को वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा है।
कुछ रिपोर्टों में लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर के संभावित हस्तांतरण का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, एक अरब डॉलर की राशि हस्तांतरित किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि किसी संभावित वित्तीय समझौते या संघर्षविराम को लेकर अंतिम सहमति बनी है या नहीं।
तेहरान में हुई बैठक के भारत पर संभावित प्रभावों के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली संबंधित गतिविधियों की निगरानी कर रही है।
हालांकि, भारत ने बैठक के परिणामों या उसमें शामिल देशों के बीच संभावित समझौतों को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की।
पाकिस्तान की भागीदारी के कारण यह बैठक भारत के लिए भी कूटनीतिक महत्व रखती है, लेकिन विदेश मंत्रालय के बयान में इसे सीधे भारत के खिलाफ किसी गठबंधन या पहल के रूप में नहीं बताया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल से मालदीव और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर भी सवाल पूछा गया।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
इस पर जायसवाल ने कहा कि भारत और मालदीव के संबंध नई दिल्ली की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और सागर दृष्टिकोण पर आधारित हैं।
























