जर्मनी और भारत ने रक्षा उद्योग सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बुधवार को बर्लिन में अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह के साथ 10 सूत्रीय सहयोग योजना पर हस्ताक्षर के बाद यह जानकारी दी।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग का विस्तार करना और रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाना है।
समझौते के बाद पिस्टोरियस और राजनाथ सिंह ने कील स्थित जर्मन पनडुब्बी निर्माता कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स का दौरा किया, जहां उन्होंने एक आधुनिक पनडुब्बी का निरीक्षण किया।
पिस्टोरियस ने कहा कि यह समझौता रक्षा उद्योग सहयोग को अगले स्तर पर ले जाएगा और यह बराबरी की साझेदारी होगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग दोनों देशों के लिए औद्योगिक स्तर पर और उनकी सेनाओं के लिए पारस्परिक लाभ सुनिश्चित करेगा।
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा उपकरण आयातक माना जाता है। नई दिल्ली मुंबई में लगभग आठ अरब यूरो की लागत से छह पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें जर्मन कंपनी के साथ साझेदारी प्रस्तावित है।
पिस्टोरियस ने बताया कि इस परियोजना को लेकर घरेलू स्वीकृति प्रक्रियाएं फिलहाल जारी हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इस समझौते पर हस्ताक्षर कर पाएंगे।” उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले तीन महीनों के भीतर इस पर फैसला हो सकता है।
स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान के अनुसार, भारत अब भी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है। हालांकि २०१९ से २०२३ के बीच भारत ने अपने ३६ प्रतिशत हथियार रूस से खरीदे, लेकिन यह हिस्सा लगातार घट रहा है।














