भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने दस्तक दी। चक्रवात के कारण भारी बारिश हुई और हवाओं की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चक्रवात के तट से टकराने की प्रक्रिया मंगलवार तड़के एक बजे शुरू हुई।
यह तूफान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही चक्रवात 'अरनब' ने दक्षिणी भारत के तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। उस तूफान में पांच लोगों की मौत हुई थी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से से आगे बढ़ते हुए दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचा।
मौसम विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी जानकारी में कहा कि चक्रवात के तट से टकराने की प्रक्रिया जारी है।
आईएमडी ने बताया, “चक्रवात के अगले हिस्से में स्थित बादलों की दीवार का एक भाग जमीन पर पहुंच चुका है और तूफान की आंख तट को छू रही है।”
मौसम विभाग के अनुसार, उस समय तूफान का केंद्र पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट के निकट स्थित था।
110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं हवाएं
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
तेज हवाओं और बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में एहतियाती कदम उठाए हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात के मद्देनजर अधिकारियों को पहले से तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार तूफान से राज्य में लगभग 6,000 से 8,000 बिजली के खंभों को नुकसान पहुंच सकता है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इससे बिजली आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, यह संभावित नुकसान का अनुमान है। वास्तव में कितने बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने निचले और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों ने संभावित नुकसान को कम करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में तैयारियां तेज की हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता तेज हवाओं, भारी बारिश और संभावित बाढ़ से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ओडिशा में 1.51 लाख से अधिक लोगों को निकाला गया
पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी चक्रवात मुरासु को लेकर बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में 1,51,434 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
ओडिशा सरकार ने संवेदनशील इलाकों में तैयारियां तेज करते हुए संभावित चक्रवाती प्रभाव को कम करने के उपाय किए हैं।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई तूफान से होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए की गई है।


















