भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए 1.5 अरब डॉलर की एक नई योजना शुरू की है। इसके तहत देश में 92 गीगावाट-घंटे (GWh) की अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।
सरकार ने बुधवार को बताया कि यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली को संग्रहीत करने की क्षमता बढ़ाना है।
भारत दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक देश है और अपनी बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अब भी बड़े पैमाने पर कोयले पर निर्भर है।
1.4 अरब से अधिक आबादी वाले भारत में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, सरकार ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सरकार के अनुसार, नई योजना के तहत 60 गीगावाट-घंटे की पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके अलावा 30 गीगावाट-घंटे की बैटरी आधारित भंडारण क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से दो गीगावाट-घंटे की अतिरिक्त क्षमता तैयार की जाएगी।
पंप्ड हाइड्रो तकनीक में अतिरिक्त बिजली का इस्तेमाल करके पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पंप किया जाता है। बाद में ज़रूरत पड़ने पर पानी को नीचे छोड़कर बिजली पैदा की जाती है।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के तहत दिए जाने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों से अगले पांच वर्षों में करीब 10 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित होगा।
प्रस्तावित नई भंडारण क्षमता भारत की मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लगभग 170 प्रतिशत के बराबर होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह योजना देश में अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण और ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत बनाने में मदद करेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 30 करोड़ डॉलर की एक अलग योजना को भी मंज़ूरी दी।
इसके तहत देश में चार खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने में सहायता दी जाएगी।
लिथियम और निकल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में होता है।
सरकार ने एक बयान में कहा कि भारत फिलहाल इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
मंत्रिमंडल के अनुसार, इस निर्भरता को कम करने और देश में स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित उद्योगों को विकसित करने के लिए घरेलू प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार आवश्यक है।





















