मणिपुर में कुकी और नागा संगठनों की ओर से लगाए गए आर्थिक नाकेबंदी के कारण नेशनल हाईवे-2 पर आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह हाईवे राज्य की जीवनरेखा माना जाता है।
नाकेबंदी के चलते सैकड़ों ट्रक और अन्य वाहन हाईवे पर फंसे हुए हैं। जरूरी सामान, परिवहन सेवाओं और माल ढुलाई पर इसका बड़ा असर पड़ा है।
यूनाइटेड नागा काउंसिल ने नागा-बहुल इलाकों में अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की है। संगठन का आरोप है कि छह नागा नागरिक, जिनमें दो पादरी भी शामिल हैं, अब भी लापता हैं। संगठन ने अधिकारियों पर लापता लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में नाकामी का आरोप लगाया है।
वहीं, कुकी इंपी मणिपुर ने भी अपनी जारी बंदी को 48 घंटे और बढ़ा दिया है। संगठन का आरोप है कि सरकार सेनापति ज़िले में कथित रूप से बंधक बनाए गए कुकी लोगों को छुड़ाने में नाकाम रही है।
इस बीच, सुरक्षा बलों ने चुराचांदपुर और कांगपोकपी ज़िलों के संवेदनशील इलाकों में तलाशी और क्षेत्रीय नियंत्रण अभियान तेज कर दिए हैं। संदिग्ध उग्रवादी गतिविधियों की सूचना के बाद कई इलाकों में निगरानी और तैनाती बढ़ाई गई है।
बढ़ते तनाव के बीच चर्च नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मिला और समुदायों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की। दो अलग-अलग चर्च टीमें कांगपोकपी और सेनापति ज़िलों का दौरा कर शांति वार्ता करेंगी।
इन टीमों का मकसद नागरिक समाज समूहों, चर्च नेताओं और प्रभावित परिवारों से बातचीत करना है। वे दोनों पक्षों से बंधक बनाए गए लोगों की तत्काल मानवीय आधार पर रिहाई की अपील भी करेंगी।














