वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने स्वदेशी ड्रोन तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के तेज विकास और तैनाती पर जोर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि नई तकनीकों को अपनाने में देरी भविष्य के संघर्षों में देश को नुकसान की स्थिति में डाल सकती है।
वायुसेना प्रमुख गुरुवार को नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ़ इंडियन डिफ़ेंस मैन्युफ़ैक्चरर्स यानी SIDM द्वारा आयोजित मानव रहित और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों पर एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि नवाचारों को प्रयोगशालाओं से युद्धक्षेत्र तक तेजी से पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समय पर परीक्षण, उत्पादन और सैन्य तैनाती भी उतनी ही जरूरी है।
कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी मौजूद थे। यह सेमिनार भारतीय वायुसेना और SIDM द्वारा स्वदेशीकरण, आत्मनिर्भर भारत, स्थानीय विकास और ज्ञान-आधारित साझेदारी की थीम पर आयोजित किया गया था।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और तेज निर्णय लेने वाली तकनीकें निर्णायक भूमिका निभाएंगी। ऐसे में भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी समाधान तैयार करने होंगे।
उन्होंने रक्षा उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और सेना के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, भारतीय उद्योग को ऐसी प्रणालियां विकसित करनी होंगी जो सेना की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों और जिन्हें कठिन युद्ध परिस्थितियों में भरोसेमंद तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।






















