भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से हॉर्मुज़ में किसी भी प्रकार की बाधा को भारत के लिए गंभीर चुनौती बताया।
उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालने वाली हकीकत है।”
रक्षा मंत्री तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जर्मनी पहुंचे हैं, जिसका उद्देश्य भारत-जर्मनी के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। इस दौरान दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं।
सिंह ने बताया कि भारत ने इस संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक सक्रिय और समन्वित रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का एक समूह लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए समय पर कदम सुझा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने, महंगाई पर नियंत्रण रखने और नागरिकों तथा उद्योगों को बाहरी झटकों से बचाने पर है।
भारत-जर्मनी सहयोग पर बोलते हुए सिंह ने “आत्मनिर्भर भारत” पहल को केवल खरीद कार्यक्रम नहीं, बल्कि सह-निर्माण, सह-विकास और नवाचार का अवसर बताया। उन्होंने जर्मनी की औद्योगिक क्षमताओं और उसके मिटलस्टैंड की सराहना की।
सिंह ने कहा कि भारत में स्टार्टअप और निजी कंपनियां तेजी से रक्षा क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं बनती हैं।


















