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मध्य पूर्व युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति को लगा झटका 1973 के तेल प्रतिबंध से दोगुना: तुर्क वित्त मंत्री
शिमशेक ने कहा कि मध्य पूर्व के कई हिस्से पहले से ही आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं, जबकि युद्ध से सीधे प्रभावित देशों के निर्यात और आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति को लगा झटका 1973 के तेल प्रतिबंध से दोगुना: तुर्क वित्त मंत्री
सिमसेक ने कहा, "अगर स्थायी शांति नहीं है, तो स्थायी सुधार के बारे में बात करना बहुत मुश्किल होगा।"

तुर्किए के राजकोष और वित्त मंत्री मेहमत शिमशेक ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध क्षेत्र की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था को बुनियादी रूप से बदल देगा। इसके परिणामस्वरूप देश अपनी रणनीतिक निर्भरता कम करने, व्यापार मार्गों में विविधता लाने और क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के प्रयास तेज़ करेंगे।

शनिवार को TRT वर्ल्ड फ़ोरम में 'कठिन आर्थिक सुधार की ओर: मध्य पूर्व के युद्धों के बाद राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं' विषय पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए शिमशेक ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष के कारण विशेष रूप से ऊर्जा बाज़ारों में आपूर्ति को बड़ा झटका लगा है, जिसका प्रभाव मध्य पूर्व से कहीं आगे तक फैल रहा है।

आपूर्ति में व्यवधान के पैमाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "हम इस समय जिस संकट का सामना कर रहे हैं, वह 1973-74 के तेल प्रतिबंध से दोगुना और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में हुए व्यवधान से सात गुना बड़ा है।"

शिमशेक ने कहा कि मध्य पूर्व के कई हिस्से पहले से ही आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं, जबकि युद्ध से सीधे प्रभावित देशों के निर्यात और आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की रफ़्तार धीमी हुई है और संघर्ष के कारण आंशिक रूप से बढ़ी महंगाई के बीच वित्तीय परिस्थितियां भी कठिन हो गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए शिमशेक ने कहा कि 1946 से अब तक हुए 170 संघर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि युद्धों के कारण आमतौर पर आर्थिक उत्पादन में 3 से 7 प्रतिशत तक का नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ आर्थिक सुधार के लिए स्थायी शांति स्थापित करना आवश्यक है।

शिमशेक ने कहा, "यदि स्थायी शांति नहीं होगी, तो स्थायी आर्थिक सुधार की बात करना भी बेहद कठिन होगा।"

तुर्किए की रणनीतिक स्थिति

शिमशेक ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष देशों को अपनी रणनीतिक निर्भरताओं पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित करेगा, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर निर्भरता के मामले में।

उनके अनुसार, भविष्य में ऐसे व्यवधानों से पैदा होने वाले ख़तरों को कम करने के लिए सरकारें वैकल्पिक व्यापार गलियारों, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में अधिक निवेश कर सकती हैं।

वित्त मंत्री ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) के देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को मज़बूत करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में इस क्षेत्र के देशों के बीच आपसी व्यापार अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है।

शिमशेक द्वारा प्रस्तुत तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में क्षेत्रीय व्यापार कुल व्यापार का लगभग 67 प्रतिशत है, जबकि पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत तक पहुंचता है।

वहीं, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में यह हिस्सेदारी केवल 15 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए आर्थिक गतिविधियों में विविधता लाना आवश्यक होगा।

तुर्किए के मध्यस्थता प्रयास जारी

तुर्किए की स्थिति पर चर्चा करते हुए शिमशेक ने कहा कि दुनिया भर में संरक्षणवादी नीतियों के बढ़ते रुझान के बावजूद अंकारा नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि तुर्किए के 54 मुक्त व्यापार समझौते हैं, जिनके दायरे में देश के लगभग 70 प्रतिशत निर्यात आते हैं।

इसके अलावा जापान, इंडोनेशिया, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और कनाडा के साथ नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों को लेकर बातचीत जारी है।

शिमशेक ने क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में तुर्किए की भूमिका को भी रेखांकित किया।

इनमें बीजिंग को लंदन से जोड़ने वाला 'मिडिल कॉरिडोर' और खाड़ी क्षेत्र तथा इराक को तुर्किए एवं यूरोपीय बाज़ारों से जोड़ने वाली 'डेवलपमेंट रोड' परियोजना शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि तुर्किए विभिन्न कूटनीतिक पहलों और मध्यस्थता प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

इनमें आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शांति समझौते के प्रयास, रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को सुगम बनाने की पहल और ग़ज़ा में शांति स्थापित करने के प्रयास शामिल हैं।

रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करना भी ज़रूरी

हालांकि, शिमशेक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शांति स्थापित करने के प्रयासों के साथ-साथ रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि तुर्किए का तेज़ी से विकसित होता रक्षा उद्योग देश के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बन रहा है।

तुर्किए के रक्षा उद्योग में लगभग 4,000 कंपनियां सक्रिय हैं और इस क्षेत्र में 1,400 से 1,500 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

शिमशेक के अनुसार, पिछले वर्ष तुर्किए के रक्षा उपकरणों के ऑर्डर लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुंच गए थे, जबकि वैश्विक रक्षा निर्यातकों की सूची में देश 11वें स्थान पर था।

उन्होंने युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में तुर्किए की संभावित भूमिका का भी उल्लेख किया।

शिमशेक ने अनुमान जताया कि संघर्षों से प्रभावित पड़ोसी क्षेत्रों में अगले एक दशक के दौरान पुनर्निर्माण की ज़रूरतें कम से कम एक लाख करोड़ डॉलर (एक ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच सकती हैं।

अपने संबोधन के अंत में शिमशेक ने कहा कि मज़बूत औद्योगिक आधार, बुनियादी ढांचे और विस्तारित सेवा क्षेत्र के कारण तुर्किये क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण से लाभ उठाने की अच्छी स्थिति में है।

उन्होंने कहा, "युद्ध हमारे हित में नहीं हैं। क्षेत्र में स्थिरता, शांति और समृद्धि से हमें सबसे अधिक लाभ होता है।"

स्रोत:TRT World
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