भारत सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संशोधित व्यवस्था के तहत छह साल की सेवा पूरी करने वाले सभी इच्छुक और पात्र अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में नियुक्ति का अवसर मिलेगा।
समाचार पत्र द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने बुधवार को अग्निवीरों की सेवा अवधि में दो साल के विस्तार की घोषणा की थी। इसके एक दिन बाद गुरुवार, 5 नवंबर को रक्षा मंत्रालय ने योजना में किए गए बदलावों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अग्निपथ योजना का मूल ढांचा बरकरार रखा गया है। नई व्यवस्था के तहत शुरुआती चार साल की सेवा के बाद नियमित कैडर में शामिल नहीं किए जाने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा।
इस तरह इन अग्निवीरों की कुल सेवा अवधि चार साल से बढ़कर छह साल हो जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, दूसरे कार्यकाल की समाप्ति पर नियमित सेवा में शामिल होने के इच्छुक और निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित कैडर में शामिल किए जाने वाले अग्निवीरों की वरिष्ठता सुरक्षित रखी जाएगी।
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में की गई थी। इसके तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की चार साल के लिए भर्ती की जाती है।
मूल व्यवस्था के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किए जाने का प्रावधान था। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा से मुक्त कर दिया जाता था।
हालांकि, नई व्यवस्था में इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार के मुताबिक, यह बदलाव अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में लंबे समय तक सेवा देने और नियमित नियुक्ति हासिल करने का अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगा।




















